Monday, January 12, 2015

तुलसी के संबंध में 10 खास बातें !!!!

प्राचीन काल से ही यह परंपरा चली आ रही है कि घर में तुलसी का पौधा होना चाहिए। शास्त्रों में तुलसी को पूजनीय, पवित्र और देवी स्वरूप माना गया है, इस कारण घर में तुलसी हो तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। यदि ये बातें ध्यान रखी जाती हैं तो सभी देवी-देवताओं की विशेष कृपा हमारे घर पर बनी रहती है।

  1. शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाना चाहिए !                                                                                             शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते अर्पित नहीं करना चाहिए। इस संबंध में एक कथा बताई गई है। इस कथा के अनुसार प्राचीन काल में दैत्यों के राजा शंखचूड़ की पत्नी का नाम तुलसी था। तुलसी के पतिव्रत धर्म की शक्ति के कारण देवता भी शंखचूड़ को हराने में असमर्थ थे। तब भगवान विष्णु ने छल से तुलसी का पतिव्रत भंग कर दिया। इसके बाद शिवजी ने शंखचूड़ का वध कर दिया।   जब यह बात तुलसी को पता चली तो उसने भगवान विष्णु को पत्थर बन जाने का श्राप दिया। भगवान विष्णु ने तुलसी का श्राप स्वीकार कर लिया और कहा कि तुम धरती पर गंडकी नदी तथा तुलसी के पौधे के रूप में रहोगी। इसके बाद से ही अधिकांश पूजन कर्म में तुलसी का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है, लेकिन शंखचूड़ की पत्नी होने के कारण तुलसी शिवलिंग पर अर्पित नहीं की जाती है।
  2. रोज करें तुलसी का पूजन !                                                                                                                           हर रोज तुलसी पूजन करना चाहिए साथ ही, हर शाम तुलसी के पास दीपक लगाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि जो लोग शाम के समय तुलसी के पास दीपक लगाते हैं, उनके घर में महालक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है |
शेष 8 अन्य बाते जानने के लिए झुड़े रहिये Dharmik के साथ !
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धन्यवाद !!!

Friday, January 2, 2015

जानिये पृथ्वी पर भगवान के साक्ष्य रूप

आइये आज धरती पर भगवान है..सिद्ध करके दिखाता हूँ!
  1. "अमरनाथजी " में शिवलिंग अपने आप बनता है|
  2. "माँ ज्वालामुखी" में हमेशा ज्वाला निकलती है |
  3. "मैहर माता मंदिर" में रात को आल्हा अब भी आते हैं|
  4. सीमा पर स्थित तनोट माता मंदिर में 3000 बम में से एक का ना फूटना|
  5.  इतने बड़े हादसे के बाद भी "केदारनाथ मंदिर" का बाल ना बांका होना|
  6.  पूरी दुनियां मैं आज भी सिर्फ "रामसेतु के पत्थर" पानी में तैरते हैं|
  7. "रामेश्वरम धाम" में सागर का कभी उफान न मारना|
  8.  "पुरी के मंदिर" के ऊपर से किसी पक्षी या विमान का न निकलना| 
  9.  "पुरी मंदिर" की पताका (झंडा) हमेशा हवा के विपरीत दिशा में उड़ना|
  10.  उज्जैन में "भैरोंनाथ" का मदिरा पीना|
  11.  गंगा और नर्मदा माँ (नदी) के पानी का कभी खराब न होना|
  12.  उनाई (तापी) में 40° गर्म पानी 365 दिन जमींन से निकलता  जहा भगवान राम ने योगी के कुष्ठ रोग ठीक करने के लिए गर्म पानी बाण मार कर जमींन से निकाला था|
  13.  भीमगोडा (सिवाना, बाङमेर ) जहा पांडव श्री भीम ने वनवास के समय माता कुंती को प्यास लगी तब पहाड़ को गोडा (घुटना) मारकर पानी निकाला था जहाँ आज भी 365 दिन अमृत समान पानी निकलता हैं । भले ही कितना भी अकाल हो, और भयंकर अकाल के दिनों में भी यह पानी बंद नही होता |
  14.  चित्तोडगढ बाण माताजी मन्दिर मे आरती के वक्त त्रिशूल का अपने आप हिलना (कम्पन) करना भी एक जीता जागता चमत्कार है | 

(अब जिसका मन करे "प्रभु" का नाम लेकर इस पोस्ट को शेयर  करता चले)।

    हिन्दू नव वर्ष का इतिहास व महत्त्व

     चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हमारा नववर्ष है। हम परस्पर उसी दिन एक दुसरे को शुभकामनाये दे | भारतीय नववर्ष का ऐतिहासिक महत्व :-
     1. यह दिन सृष्टि रचना का पहला दिन है। इस दिन से एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 110 वर्ष पूर्व इसी दिन के सूर्योदय से ब्रह्माजी ने जगत की रचना प्रारंभ की।
    2. विक्रमी संवत का पहला दिन: उसी राजा के नाम पर संवत् प्रारंभ होता था जिसके राज्य में न कोई चोर हो, न अपराधी हो, और न ही कोई भिखारी हो। साथ ही राजा चक्रवर्ती सम्राट भी हो। सम्राट विक्रमादित्य ने 2068 वर्ष पहले इसी दिन राज्य स्थापित किया था।
    3. प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक दिवस : प्रभु राम ने भी इसी दिन को लंका विजय के बाद अयोध्या में राज्याभिषेक के लिये चुना।
     4. नवरात्र स्थापना : शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात्, नवरात्र स्थापना का पहला दिन यही है। प्रभु राम के जन्मदिन रामनवमी से पूर्व नौ दिन उत्सव मनाने का प्रथम दिन।
    5. गुरू अंगददेव प्रगटोत्सव: सिख परंपरा के द्वितीय गुरू का जन्म दिवस।
    6. समाज को श्रेष्ठ (आर्य) मार्ग पर ले जाने हेतु स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी दिन को आर्य समाज स्थापना दिवस के रूप में चुना।
     7. संत झूलेलाल जन्म दिवस : सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए।
    8. शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ दिवस : विक्रमादित्य की भांति शालिनवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना।
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    जय हिंदू !